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Monday, July 25, 2011

मानव-शास्त्र - मलय राय चौधरी

मैं लुटने को तैयार हूँ, आओ, ओ घातक चमगादड़ !
फ़ाड़ दो मेरे कपड़े, उड़ा दो मेरे घर की दीवारें
बन्दूक चलाओ मेरी कनपटी पर और मुझे कारा में पीटो.
फ़ेंक दो मुझे चलती ट्रेन से: बंधक रखो और नज़र रखो मुझपे;
मैं एक भू-गर्भीय यंत्र हूँ, परमाणु युद्ध की झलक देखने को जीवित
एक अधर्मी खच्चरी का नीले-लिंगी अश्व द्वारा गर्भाधान..
(’प्रौत्योघात-मलय राय चौधरी’ का मूल बँगला से रुपान्तरण)

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