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Showing posts from June, 2020

शांति

स्तब्ध, नि:शब्द, भावहीन प्रस्तर-सम नयन - नीरहीन। शून्य को समर्पित दृष्टि, दृष्यहीन। कोप नहीं, द्वेष नहीं, राग नहीं, वैराग्य नहीं शोक नहीं और हास्य नहीं - पूर्णत: संवेदनहीन। और ठीक समक्ष, बैठी है वो, देखती खुद को, एक मुस्कुराहट, अधरों पर लिए मुख पर, एक असीम शांति। बंधनमुक्त, अवध्य, अनंत की ओर प्रस्थान को आतुर।                (24 - जून - 2020)

भटकती रुहों की कब्रगाह

सजती है ये कब्रगाह - हर रात एक नई महफ़िल में, मधुर झंकारों के शोर में. आते हैं वे सभी और मनाते हैं शोक अपनी रुह की मौत का - छलकते शराब और सिगरेट के धुओं में; कुछ खुशनसीब - शैम्पेन और सिगार में. इन रुहों मे है: एक पुलिसमैन - छोड़ा जिसने एक दुर्दांत अपराधी को रिश्वत लेकर. एक डौक्टर - जिसने मरीज़ को न देख, उसकी जेब को देखा. एक वकील - जिसने दिलाई एक कातिल को ज़मानत मोटी फ़ीस वसूलकर एक जज़ - जिसने सुनाया था एक गलत फ़ैसला लालच या दबाव में. कुछ ऐसी भी हैं रुहें जो शराब खरीद नहीं सकते खड़े महफ़िल के बाहर शिकायती अंदाज़ में - आखिर उन्हे भी है अपराधबोध! ये कब्रगाह - हर रात सजती है. अफ़सोस है उन्हे अपनी मौतों का - मनाते हैं शोक - पीकर शराब, सिगरेट के धुओं के बीच लज़ीज़ पकवानों का स्वाद लेकर. Translated from my poem "Graveyard of Lost Souls" written in 2013.

पुरानी डायरी

कुछ पुराने कागज़ात ढूँढते वक्त, हाथ आई ये पुरानी डायरी. पीले बदरंग कवर में, सन २००१ की मटमैले पन्ने थोड़े फूले से, शायद कभी भींग गये होंगे - इन गुजरे सालों में. पलटे जो पन्ने मैंने, उत्सुकता मे, और देखा, पुराने पन्नो में दर्ज़ कई कविताएँ, कई ख्याल, और कुछ आकांक्षाएँ. कितने ही हर्फ़, भूल चुका हूँ अब कितने - जिनके आज कोई मायने नहीं. कुछ पन्ने, जिनकी लिखावट धुल गई है, शायद फ़ाउन्टेन पेन से लिखी थी - ये इबारत खास थे, जब लिखे थे, अब मिट गये हैं वक्त के हाथों. एक तस्वीर, चिपका रखी थी मेरे पिता की - एक पन्ने पर. वो आज भी वैसी ही है - अब मुस्कुराती सी दिखती है माँ का साथ जो मिल गया है. एक-दो पत्र - स्टेपल से संजोए कुछ खास नहीं लिखा उनमें, पर आजकल चिट्ठियाँ कौन लिखता है भला. अधिकतर कविताएँ - आज पढ़ा तो हँस पड़ा! लिखना शुरु किया था मैंने, ऐसी बचकानी तुकबंदियों से. उन ख्यालों को किसी दिन, फ़िर से लिखूंगा एक प्रौढ़ मन से. ये डायरी आधी ही भरी है, और आखिरी दर्ज़ है, २०११ नवम्बर में. लिखना बन्द कर दिया था मैंने - क्यूँ? क्या हुआ उसके बाद? मुझे खुद याद नहीं.                               12-जून -2020