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Friday, February 4, 2011

Bekhayali ka khayal.... in words..

खूशबू ये तेरी, हवा जो लायी है;

हमपे ये कैसी, खुमारी छाई है.

खोया मैं तेरे, दिलकश ख्यालों में;

सोया मैं तेरी, चाहत के ख्वाबों में.

रातों को जागूँ, दिन को तड्पूँ..

बेख्याली में भी, तेरा ही ख्याल है;

क्या है ये, बस यही सवाल है..

dated: 20 Nov, 2010


A new take on Hindi Poetry!!!!

Ek aur din dhal gaya,
Bojhil aur Laachaar sa;
Stabdh Chandni ko Kohre ne
Chhanni sa dhank rakha hai..

Shayad Ous ki boond se bheega hoga,
Ye gaal geela maalum padta hai;
Aansoo to ab aate nahi,
In pathrayi aankhon me.

Zinda rahne ki chaahat hai,
Pata nahi kaise;
Safar ye kaisa hai, Chalna bhi
Roz hai aur jana kahin nahi.

Manzil kya hoti hai,
Jana nahi ab tak;
Bas bezar sa safar hai
Pagdandi ke raaste...

Dated: 16 January,2011

Undefined!!!!

भीगी है रात,

ऒस की बूँदों से.

रजनीगन्धा सी महकती चान्दनी..

नि:शब्द, स्तब्ध,

चाँद

अपनी ही धुन में;

झिंगुरों की बेज़ार सी ये तान.

सारा जहाँ सोया होगा ;

जागता हूँ मैं तन्हा क्यूँ .

जागता हूँ मैं तन्हा क्यूँ...

.
Dated:20 November,2010

Tu..

तू,

मेरे ख्वाबों में बसी है;

तू,

मेरे होंठों की हँसी है.

तू,

मेरे दिल कि दुआ है;

तुझसे मिलके,

मुझको कुछ हुआ है.

तुझसे ही बंधी है,

मेरे साँसों की डोर;

जाउँ, तो जाउँ कहाँ,

जाउँ जो तुझे छोड.

आजा मेरी बाहों में,

खो जाएँ हम संग;

आओ रंग जायें अब,

दोनों एक ही रंग..

Dated: 4th January,2011