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Saturday, March 26, 2011

Just a small thought..

प्रेम का बंधन न बाँधो पिया;
बस प्रेम-ही-प्रेम हो जीवन में;
जल-सिंधु के प्रवाह सम,
अंत:हृदय सागर-कूल..

Dated 26 March, 2011

Thursday, March 24, 2011

"पलटा मानुश" (1985) by Malay Roy Choudhery


खतित; धर्म-च्युत:

और ज़िहाद को मुखातिब.

राजश्री-हीन, एक सम्राट

पतित स्त्रियाँ- हरमगामी.

नादिर शाह से तालीमशुदा

तलवार को चूम, जंग को तैयार

हवा पर सवार घोडी;

मशालयुक्त मैं घुडसवार.

टूटे-बिखरे जंगी शामियानों की तरफ़

बढता हुआ मैं.

धू-धू जलते नगर

के दरमियान;

एक नंगा पुजारी-

शिवलिंग के साथ

फ़रार..

-Malay Roy Chaudhery

Translated from Bengali and English

by Diwakar A P Pal

dated : 21 March, 2011

Sunday, March 6, 2011

Aaj Fir... Dated 7 March,2011 @ 2 am..

आज फ़िर जीने की ख्वाहिश जागी है;
आज फ़िर एक सुहाना ख्वाब देखा था.

सुबह के धुंधलके में, लालिम रोशनी के साथ;
एक नई मंज़िल का साथ देखा था.

एक पुराना मर्ज़ था, सीने में दबा-सा;
उसका ही खातिब, इलाज़ देखा था.

मरासिमों के फ़ंदे, घुटन दे रहे थे;
मरासिमों से खुद को आज़ाद देखा था.

सेहर नया है, नई इक सोच है;
इस सोच से मुखातिब, खुद को एक बार देखा था.

आज फ़िर जीने की ख्वाहिश जागी है,
आज फ़िर एक सुहाना ख्वाब देखा था..

Tuesday, March 1, 2011

रेगिस्तान

राहगीरों के सुर्ख चेहरे
गीला बदन, सूखा गला.
आधी खाली मशक.
ऊँटों के काफ़िले:
उनकी घन्टियों की
आँधी के साथ
जुगलबन्दी.

रेत के सूखे टिब्बे;
भूरा, रेत का गुबार.
पीली, चिलचिलाती धूप.
हरियाली के नाम पर
कैक्टस के छोटे-छोटे पौधे.

आज:

रेगिस्तान में ऊँट नहीं चलते;
चलती हैं एयर-कन्डीशंड गाडियाँ.
मशक की जगह
ठन्डी, मिनरल वाटर की बोतलें.
आई-पौड का संगीत तो है;
पर एकाकी कानों में सीमित;
शान्तिप्रद!

बहुत कुछ बदल गया!
नहीं बदला तो बस:
भूरा, रेतीला गुबार
और
कैक्टस के छोटे-छोटे पौधे..
Dated: 1st March,2011

Dated: 26 February,2011

वन मे हिरणी

हुई सतृष्ण.

जेठ दुपहरी,

जल विहिन..


भीषण लू,

मरुस्थल की रेत;

जलते हैं खुर:

बचने को

धधकती सी ज़मीन से

भागती है वो तेज़..

बेचैन..

तरु-वर की छाँव,

दूर नहीं;

पर पानी कहाँ!


रेगिस्तान मे बनता

एक प्रतिबिम्ब:

दौडती है वो,

हिरणी;

जल विहिन..


मरीचिका:

जीवन की अभिलाशा..


जरुरत:

कुदरत का खेल..