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Friday, February 4, 2011

Undefined!!!!

भीगी है रात,

ऒस की बूँदों से.

रजनीगन्धा सी महकती चान्दनी..

नि:शब्द, स्तब्ध,

चाँद

अपनी ही धुन में;

झिंगुरों की बेज़ार सी ये तान.

सारा जहाँ सोया होगा ;

जागता हूँ मैं तन्हा क्यूँ .

जागता हूँ मैं तन्हा क्यूँ...

.
Dated:20 November,2010

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