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a new take on poetry....

एक और दिन ढल गया, बोझिल और लाचार सा; स्तब्ध चांदनी को कोहरे ने छन्नी सा ढँक रखा है.. शायद ऒस की बूँद से भीगा होगा, य़े गाल गीला मालूम पडता है; आँसू तो अब आते नहीं, इन पथरायी आँखों में. जिन्दा रहने की चाहत है, पता नहीं कैसे; सफ़र ये कैसा है, चलना भी रोज़ है और जाना कहीं नहीं. मंज़िल क्या होती है, जाना नहीं अब तक; बस बेज़ार सा सफ़र है पगडन्डी के रास्ते... Dated: 16 January,2011

क्यूं

गुलपोश ये बदन लोहबान सी महकती अदा; होंठों को तेरे छूने से खिलखिलाने लगी ये फ़िज़ा. रंगीन हुआ समाँ रौशन हुआ जहाँ; रेशम सी नाज़ुक अलकें जैसे घिर आई हो घटा. इन घटाओं की बारिश मे भीगने की ख्वाहिश; फ़िरते हैं तेरे आगे-पीछे, दीवानों के माफ़िक. आवारा तेरी नज़रें, गवारा नहीं मुझको. देखती हैं क्यूँ जमाना, जमाना क्यूँ देखे तुझको??            22 अक्टूबर 2010

Bekhayali..

Khushboo ye teri,  Hawa jo layi hai;  Humpe ye kaisi,  khumari chhayi hai.   Khoya mai tere,  dilkash khayalon me;  Soya mai teri,  Chaahat ke khwabon me.   Raaton ko jaagun,  Din ko tadpun..  Bekhayali me bhi,  Tera hi khayal hai;  Kya hai ye,  Bas yahi sawaal hai..                  dated: 20 Nov, 2010

स्वच्छन्द बन्जारा

स्वच्छंद बंजारा एक अकेला ख्वाब था देखा, नन्हा-नन्हा, प्यारा-प्यारा; एक अकेले ख्वाब की खातिर वारा मैंने जीवन सारा. एक अकेला ख्वाब ही था वो मेरे जीने का सहारा; एक अकेली जीत थी जिसके लिये मैं अप्ना सब कुछ हारा. जीती न थी ये दुनिया मैंने जीत वो थी बस मन-ही-मन में, जीत न थी वो पल भर की जश्न का लम्हा पल में सिमटा. सिमट आयी थी जहाँ की खुशियाँ, सिमट आया था जहाँ ये सारा; एक जीत का ख्वाब था मेरा जीवन का वो लम्हा प्यारा. अब न रहे कोई ख्वाब इस मन में, अब न रहा कोई मकसद प्यारा. आब जी सकता हूँ खुल कर मैं अप्ना जीवन स्वच्छन्द बन्जारा... dated: 19th Oct,2010

भीगी भीगी पलकें

भीगी-भीगी पलकें कुछ इशारे कर गयी झुकती हुई नज़रें कुछ इशारे कर गई दिल की हर धडकन को नाम तुम्हारे कर गई. मदहोश हम हो गये खामोश हम हो गये पर तेरी ये खामोशी भी वो सारी बात कर गई. दिल कि हर धडकन को नाम तुम्हारे कर गई. गुनगुनाती हुई ये फ़िज़ा मुस्कुराता हुआ ये समाँ गुलशन में उठी एक आदिम सी महक ज़िन्दगी में जागी एक नई सेहर. दिल की हर धडकन को नाम तुम्हारे कर गई.. भीगी भीगी पलकें कुछ इशारे कर गई दिल की हर धडकन को नाम तुम्हारे कर गई.. dated- 21 september,2010

Tumse door chala aaya hun....

Tumse door chala aaya hun, Par tujhe bhula na paya hun. Is tarah se basi hai Meri saanson me yun, Gulshan ki bayar me Mahke gulabon ki khushboo; Apni saanson ko, chalne se Na thaam paya hun. Tumse door chala aaya hun Magar tujhe bhula na paya hun. Ban ke rahti hai tu Lahu ka ik aisa katra, Bin dard ke jaan se jo Kabhi nai bichhra; Lahu ka bahna bhi to Apni ragon me, na rok paya hun. Tumse door chala aaya hun, Magar tujhe bhula na paya hun. Dhadkan me basi hai Ik teri sada, Goonjti hai kanon me Sirf teri wafa; Teri bewafai ko ab tak Kabool na paya hun; Tumse door chala aaya hun. Magar tujhe bhula na paya hun. Tumse door yun chala to aaya hun, Magar tujhe bhula na paya hun... dated: 3rd september,2010

A short verse, Flattering d grl!!

इतनी लौ खुदा में लगाते, तो पीर न हो जाते! पर तेरी बाहों का सुकून, खुदाई में कहाँ पाते.. ये तो इनायत है रब की, की तू है मेरे साथ, वर्ना खुदा को हम, कब भला पहचान पाते.. dated March 2009